अब तो जागो भाइयो ....अंकुर मिश्र ''युगल''

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तोड़ मोह के पाशों को,
भर लो वक्ष स्थल में आग |
अब समय नहीं है सोने का ,
राम पुत्र तू जाग जाग ||
बन पांचाली का क्रोध महा ,
बन जा तू ज्वाला प्रचंड |
अरिदल रण को छोड़ भगे ,
हो जाये उनका मान खंड ||
चारो दिशाएं गूंज उठे ,
ऐसा हो तेरा युद्ध राग |
अब समय नहीं है सोने का ,
राम पुत्र तू जाग जाग ||
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हाय रे परिवर्तन ...........


मेरे पूज्य बाबा श्री श्री धर मिश्र जी द्वारा 8 दिसंबर १९५० को जब यह कल्पना की गयी थी की एक मानव को ऐसी भी
जीवन यात्रा करनी पड़ेगी की जिसमे उसका ह्रदय ही केवल उसका साथ देगा शेष सांसारिक दिखावट केवल दिखावट ही रह जाएगी तब बाबा को ''कवि सम्मलेन'' में महत्व नहीं दिया गया और उनका मजाक उड़ाया गया !
पर आज की दशा देख कर तो लग रहा है की मानव का ह्रदय भी उसके साथ नहीं है और वह मात्र एक पुतला बनकर रह गया है
उनकी उस कविता को मै यहाँ प्रकाशित कर रहा हू !
आशा है की आप इसे पड़कर उस ''सत्य'' की अनुभूति करेगे जिससे ''आप और हम '' महशूश रहे है.!
यदि उसमे आप को भी कोई त्रुटी मिले तो आप कृपया मुझे दोष दीजियेगा मेरे बाबा को नहीं क्युकी मैंने इसे पब्लिश करने की अनुमति बाबा से नहीं ली थी, लेकिन आज की दशा देखकर और इस कविता में समानता देखकर मै इसे पब्लिश करने से अपने आप को नहीं रोक पाया !
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वाही आशा के झिलमिलाते तार,
निराशा की टूटी झंकार,
प्रणय के गीत मिले अनमोल,
उसी में मिली प्यार की पीर,
झूलता सा एक पागल मन,
ने पाया पलकों कुछ नीर !!
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बासते बदल छितराए,
अरे घर सावन ही आयें,
लगे होने आनंदाचार,
पधारी अल्वेली सुकुमार !!
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छुपाये नयनो में एक प्यार,
दवी आशाओ के ही मर,
''न ठहरा लेकिन यह कुछ दिन
मांग सिंदूर भरी वैरिन !!
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वही अलको के सुखमय घन,
अभी जो बरसाते थे प्यार,
आज मसकन से विथराए,
समेटे आशा का श्रंगार !!
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शेष रह गया ह्रदय साथ ,
लगा जब परिवर्तन का हाथ !!!!!!!!!

''राजनीती के महानायक है ''अटल जी ''......अंकुर मिश्र''युगल''



1924 में जब अटल जी का जन्म हुआ था तब स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था !
उसी माहौल में पले बढे अटल जी का स्वाभाव अत्यंत सरल है, वे मृदुभाषी होने के साथ साथ कुशल समाज सेवक भी है !
जब 1957 में उन्होंने संसद भवन में प्रवेश किया तब किसी ने सोचा भी नहीं था की यही सथारण नेता देश का अभिनेता बनाकर उभरेगा !उन्होंने लगातार सतत परिश्रम एवं निरंतरता के दम पर 7 बार लोक सभा सदस्य बनकर देश में एक रिकार्ड स्थापित किया ,उन्होंने पहली बार देश को गैर कांग्रेसी सरकार दी ,संयुक्त राष्ट्र सघ में राष्ट्र भाषा हिंदी को उदीयमान किया ,कारगिल जैसे विशाल युध्ध को शांति पूर्वक निपटाया, देश के दो बार प्रधानमंत्री बनकर देश को कुशल विकाश दिया जो एतिहासिक है !वो एक राजनेता के साथ महान कवि भी है जो देश की समस्याओ के ऊपर अपने कवित्व को प्रदर्शित करते है !इन्ही महान गुणों के कारन आज वो राजनीती के महानायक बन चुके है उनके जैसा जीवन निर्वाह करने वाला न आज तक हुआ है और न ही भविष्य में होगा !
राष्ट्रपति श्री कलम सर कहते है की ''श्री अटल जी भारतीय राजनीती की परिभाषा बन चुके है जिस दिन इस सूर्य का अस्त हुआ उस दिन भारतीय राजनीती अपठनीय हो जाएगी''

उनका मुख्या हथियार शालीनता है जो आज के नेताओ से कोशो दूर है आज तो आरोप प्रत्यारोप ही राजनेताओ का मुख्य हथियार बन चुके है ! वो कड़वी से कड़वी बात अपनी शालीनता से मानव लेते थे !
पूर्व प्रधानमंत्री श्री मती इंदिरा गाँधी भी उनकी इश शालीनता के कारन उनका सम्मान करती थी !
आपने ठीक समय में राजनीती से सन्याश लेकर एक महान व्यक्तित्व का परिचय दिया है !
आज ऐसे ही प्रधानमंत्री,कुशल समाज सेवक,कुशल वक्ता,महान कवि और एक भारतीय ने अपने ८५ वर्ष पूर्ण कर लिए है आपको ज्ञात हो की २५ दिसंबर का दिन एक महान दिन मन जाता है क्योकि इसी दिन ईशा मशीह जी का अवतरण हुआ था , इसी दिन महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन जी का जन्म हुआ था ,जो अपने आप में अदिउतीय है !
तो हम श्री अटल जी के ८५वे जन्मदिन पर हार्दिक सुभ्कम्नाओ के साथ इश्वर से प्रार्थना करते है की अटल जी को दीर्घायु प्राप्त हो जिससे भरतीय राजनीती पर आपकी छत्रछाया हमेशा बनी रहे !

अब ''अफसरों'' का फैसला करेगे राजनेता ..अंकुर मिश्र ''युगल''


श्री पि.चिदंबरम द्वारा दी गयी टिपण्णी की ''अब ५० वर्ष पुरे कर चुके I.A.S. , I.P.S. ,I.F.S. अधिकारियो के कामकाज की समीक्षा की जाएगी '' क्या सही है ! कार्यकाल तो सभी का देखना चाहिए पर इसमे उम्र का व्यधान क्यों! कामकाज की समीक्षा तो अतिआवश्यक है पर नियुक्ति के समय से ही ,यदि उम्र का सवाल है तो मै चाहता हू की आधुनिक राजनीती में सबसे पहले बदलाव होने चाहिए और उसकी समीक्षा की आवश्यकता पहले है ! हमारी राजनीती में अनेक ऐसे लोगो को जगह दी गयी है जो इस के बिलकुल काबिल नहीं है ,तमाम को तो केन्द्रीय मंत्री ,राज्यमंत्री व तमाम पद दिए गए है जो अत्यंत शर्मकार है !तो श्री चिदंबरम जी आपका मतलब है की आप उन नेताओ के जरिये उन अधिकारियो की समीक्षा करायेगे जिनमे जमीं असमान का फर्क है !
मानते है हमारा देश लोकतांत्रिक है पर इतना ज्यादा लोकतात्रिक भी मत बनाइये की यहाँ प्रशासन नाम का अश्तित्व ही न बचे ! पहले ही उन अधिकारियो का ''तबादला'' आप लोग अपने मनमाफिक जगह करके उन्हें अपना पुतला बनाये हुए है अब और ज्यदिती न करे तो अच्छा ही होगा !
हमें चाहिए की की प्रशासनिक अधिकारियो के कामकाज में राजनेताओ का दखल समाप्त कर उनके लिए उनके ही आयोग के नियमो को लागु करना चाहिए जो उनके लिए एवं भारतीयों के लिए हितकारी है !
तो आप जैसे महान नेताओ से गुजारिश है की आप लोग कृपया प्रशासन को इतना कमजोर न बनाये की वो अपने कामो को करने के लिए भी डरे और अपने पद का अश्तित्व भूलकर वह उस जनता को भूलकर ,(जिसके लिए वह आया है और जिसने आपको यह पद दिया है) आपका कतपुतला बनकर आपकी सेवा में ही जुट जाये और देश एवं जनता को भूल ही जाये!
आशा है आप यह बाते मजाक में नहीं लेगे!

ओ किसान भगवान................


यह कविता मेरे पूज्यनीय बाबा
*****(श्री श्री धर मिश्र , तहसीलदार )******
द्वारा लिखित है जो आज इस दुनिया में नहीं है,
उनकी पुस्तक ****''मेरा संग्रह''**** में महान कविताओ का संग्रह है!
चूँकि वो एक राजस्व विभाग के अधिकारी थे अतः उन्होंने किसानो एवं जनता का कास्ट नजदीक से देखा है !
इस कविता में उन्होंने किसानो की दशा का वर्णन किया है.


ओ किसान भगवान ....ओ किसान भगवान.....
जगत के प्राण,
की भूत के प्राण,
किन्तु हा सुना हुआ जग विधान,
तुम्ही से निर्मित जग नादान,
पल्लवित करने वाला आप(water),
की पुश्पिर करने वाला ताप(Temp)
आज देखा जाता बल-हीन,
ओज से रहित,
रोग से ग्रसित,
वही मधुमास,
वही रसराज,
भरा था सौरभ का भंडार,
बड़ी मतवाली मस्ती से जिसकी,
लहराती हस्ती से जिसकी,
छोटी से छोटी गलियों ने,
बेशुध, भूली सी कलियों ने,
हर दल दल हर पट पट ने,
मानव के अप्रताप ताप ने,
पाया था संयोग ,विरह का-,
किन्तु वही मधुमास
की जिसके पीछे था पतझड़,
की जिसका अनुचर रहता नाश,
आज तांडव सा करता नृत्य,
बना मालिक बैठा है मृत्य,
आज क्यों शक्तिहीन बलवान,
ओ किसान भगवान ....ओ किसान भगवान.....

जो घटना ६ दिसंबर १९९१ को हुई थी उसका परिणाम निकलना ही चाहिए!...........


भारत के कानून को बहुत ही ढीला माना जाता है! यहाँ कोई भी गैर क़ानूनी मामला होने के बाद उसके न्याय दिलाने में शादियाँ लग जाती है! लेकिन लिब्रहान आयोग (Indian Goverment) ने अपनी रिपोर्ट को पेश करने में बहुत ही जल्वाजी दिखाई और ise समय se pahle hi ,जो हिन्दू और मुशलमानो को ladane की nai टेक्निक हो सकती है और अपना वोट बैंक बढ़ने की नई सोची समझी शाजिश !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!1
अरे विदेशी आक्रमण करे और वो हजारो भारतीयों को बलि क बकरा बनाये इससे कोई मतलब नहीं है! उन महान भारतीयों को मात्र शहीदों की श्रेणी में डालकर ,उनकी फोटो दीवाल में लगाकर चार आशुं बहाकर चार दिन में भूल जाते है, और कहते है की वो महान थे उन्होंने हमारे लिए अपनी भी नहीं सोची अरे वो तो महान थे ही इसको बताने की कोई जरुरत नहीं है उन्होंने तो इसे खुद दिखा दिया! अब बारी आपकी है उनके बलिदान को खाली मत जाने दीजिये उन्होंने जिसे को खत्म करने की कोशिश की थी उसे आप जड़ से ख़त्म कर दीजिये, जो आपको महान बनाएगी ! आज अयोध्या कांड को १८ साल होने को है वहां आज तक पता नहीं चल पाया की मंदिर था या मस्जिद अरे पता भी कैसे चलेगा क्योकि उसको बनाने वाला तो अब रहा नहीं पर जो घटना ६ दिसंबर १९९१ को हुई थी उसका परिणाम निकलना ही चाहिए! वहां हजारो राम भक्त कारसेवको ने अपनी बलि di थी उस बलि क परिणाम निकलना hi चाहिए!यह mai इसलिए नहीं कह रहा ki हमारा देश हिन्दू राष्ट्र है और एक हिन्दू राष्ट्र में प्रथम प्राथमिकता हिन्दुओ को मिलनी चाहिए, बल्कि हम जिस इतिहास को मानते है ये वो इतिहास कहता है ki मंदिर vahi था आज की सरकार तो अपनी वोटो की संख्या बढ़ने के फेर में कोई परिणाम देने में सक्सगाम है नहीं उसे खतरा है ki यदि मैंने हिन्दुओ के लिए मंदिर के आदेश दिए तो मुस्लिम वोट चले जायेगे और यदि हिन्दुओ को मना किया तो हिन्दू वोट चले जायेगे !अतः हमारी आज की सरकार से कुछ नहीं होने वाला मंदिर ko बनवाने में जो सरकार सक्षम थी vo aj विपक्ष me hai!!!!!!!!!!!!!!!!!
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आज ''सेना'' नहीं ''जज्बा'' बढ़ाने कि जरुरत है! अंकुर मिश्र ''युगल''



आज मुंबई हमले को एक साल होने को है ,उसका भयावह चित्रण आज भी मस्तिष्क को चकित कर देता है, लेकिन हमारा शासन आज भी चकित नहीं है ! हम वह भयावह चित्रण भुला नहीं सकते जिसमे लगभग २०० भारतीयों की जान गई थी और हमारी औद्योगिक नगरी के तमाम होटलों पर कहर बरसा था और उस समय हमारी सरकार की तरफ से सफाई आ रही थी की हमारे पाश सही हथियार नहीं थे, हमारे पास N.S.G. कमांडो की कमी थी ,इस हमले के बाद सरकार और प्रशासन दोनों अपने को छुपाने की कोशिस कर रही थी हमारा खुफिया तंत्र आखिर किस काम के लिए है हम सुरक्षा के नाम पर इतना धन क्यों खर्च करते है कि ''डेविड हेडली'',''तह्ब्बुर राणा'' जैसे आतंकवादी मुंबई आते है और हमें पता भी चलता है !हमारी सुरक्षा विध्वंश से होती जा रही है !
हमें यदि आतंकवाद जैसे 'नासूर' को ख़त्म करना है तो अपने आप में जज्बा का 'अंकुरण' करना होगा !पुलिस को खाकी वर्दी में रहकर डंडा चलाने या एक ख़ुफ़िया अधिकारी बनाने से इस नासूर का खात्मा असंम्भव है ! आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए हमें खुद आगे बढ़ाना होगा ,,,वर्ना २६/११ जैसे हमले हमारे लिए एक छोटी घटना बन के रह जाएगी और देश में आतंकवाद का एकछत्र स्वराज्य स्थापित हो जायेगा!
अंत में उन शहीदों को नमन जिन्होंने हमारे लिए अपनी एक भी चिंता न कि और शहीदों कि स्वर्णिक श्रेणी में शामिल होने का गौरव हासिल किया! वो छोटे थे या बड़े,, हमें पता नहीं है पर वो महान थे ,महान थे महान थे !!!!!!!!!!!!!!!!!!

कवि !तुने यों गाया तो क्या ,....ankur mishra


कवि !तुने यों गाया तो क्या ,
जग बंधन से यों बंधा रहा ,
''अंकुरित'' कली जब खिल उठी,
युग-युग से से झस्न्कृत स्वालहरी,
अपने तारो से मिल न सकी!!!!!!!!
चांदनी चाँद की रात रात भर
हंसती रही मुस्कराती है
बेशक मतवाली लहरों में
चमकीली मस्ती आती है!!!!!!!!!!!!!!
पर प्रर्थ नहीं इसका
प्रियवर! यह सरे जग को भाता है
अरे प्रोषिता तप्त ह्रदय
अव्व्मी जलवा चिल्लाता है
प्रति प्रातः पदेश!!!!! ........
श्रमी रवि मुश्काराया तो क्या
कवि! तुने यों गया तो क्या गाया!!!!

''विश्व शांति'' में कितने सफल है राष्ट्रों के ''महानायक'' ---अंकुर मिश्र''युगल''



सदिया बिताती चली जा रही है ,लोग अपनोंको लगातार खोते चले जा रहे है , खाने के लिए हो या पीने के लिए, रहने के लिए हो या जाने के लिए लोग आपस में ही टकराने को तैयार हो जाते है लोग संभल भी जाये पर कुछ अपवाद शांति को समझते ही नहीं है इन्ही अपवादों को आज आतंकवादियो का नाम दे दिया है कहते है आतंकवादी जिहाद के लिए लढते है लेकिन जिहाद भी शांति का पथ पढ़ाता है क्या उन मझभियो को नहीं पता ,क्या वो अपने धर्म्ग्रथ नहीं पढ़ते है kya उनके परिवार में माँ, बहन,पिता,भाई, नहीं होते क्या उन्हें उनकी किल्कारिया कभी सुनाई नहीं देती ! आखिर उनकी सोच क्या है ,वो चाहते क्या है!विश्व व स्वयं का विधवंस ही उनका उद्देश्य है क्या !ये तो अखीवाही जन सकते है !
मै तो उनसे आज तक मिला नहीं मिलना जरुर चाहता हु मै जानना चाहता हु की उनकी सोच क्या है आखिर ऐसी क्या महत्वाकांक्षा है जो वो पूरी करना चाहते है !


पं. जवाहरलाल नेहरु ने विश्व शांति के जो स्वप्न देखे तो वो आज की तारीख में पुरे होते नहीं दिख रहे है !ओबामा व मनमोहन सर की दोस्ती इसमे क्या परिवर्तन ला सकती है वो हम प्रत्यक्ष देख ही रहे है !
''परमाणु'' मुक्त विश्व के स्वप्न आज देखना निरर्थक है ! यदि आज हम स्वयं को परमाणु मुक्त बना भी ले तो हम सुखी नहीं रह सकते है!
हजारो परमाणु बम वाले विश्व में हम ''शांति'' जैसे शब्द को निरर्थक ही विध्वंशक बनाये दे रहे है! हर देश कहता है की वो परमाणु बम अपनी सुरक्षा के लिए बना रहा है ! पर बिना परमाणु बम के भी सुरक्षा हो सकती है !हम सोचते क्यों नहीं है की आज की परमाणु शक्ति को सोचकर ही लोग भयभीत हो जाते है ! वो बच्चा जो पैदा होते ही सोचने लगता है की अब जिस दिन भी किन्ही दो वर्गों में युध्ध शुरू उस दिन हम विशावयुध्ध का रूप धारण कर हमारा विनाश अवश्य कर देगा !
उस बच्चे की पुकार तो सुनिए , विश्व को उसकी जरुरत है और विश्व को उसकी जरुरत है !कृपया विश्व को शांति का उपाशक बनाइयेऔर इसकी सुरुत करने के लिए आपको विश्व भ्रमण की जरुरत नहीं है इसको अप अपने घर में सुरु करके भी परिणाम को विश्वस्तरीय बना सकते हैं!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

सचिन तुझे सलाम ----अंकुर मिश्र’’युगल’’




आखिर एक रिकॉर्ड और रच ही डाला !
जब मेरा जन्म हुआ था तब आपने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था और मै आज २० साल का हो गया हु और अभी tak अपने क्रिकेट का साथ वखुबी निभाया है ! यद्यपि कपिल सर द्वारा १९८३ विश्व कप दिलाने के कारन क्रिकेट हमारे बिच काफी लोकप्रिय हो चुका था !
1989 में सचिन ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकट में कदम रखे और लगातार सफलता चुमते हुए देश को चमत्कार दिए
आपकी खेल व राष्ट्रभावना से देश का हर नागरिक प्रभावित है!
मैंने उनके लभभग सभी मैच देखे होगे जिसमे मुझे उनकी सर्व्स्रेस्था पारी नवम्बर २००९ की आस्ट्रेलिया के खिलाफ लगी इस पारी में वही सचिन दिख रहे थे जो १९९९ के विश्व कप में थे ! जबकि सचिन पाक. के खिलाफ १९९९ की पारी को सर्वश्रेष्ठ मानते है ! उनकी तो लभभग हर पारी बेमिशाल है और हमारे लिए वो हर पारी में कुछ न कुछ स्मरणीय छोड़ जाते है !
उनका खुद का मानना है की ''उतर- चढव तो चलते रहते है लेकिन जो उनकी शिकायत में जिंदगी व्यतीत करते है वह कभी भी सफल नहीं हो पते है ! उन्हें (सचिन) को आज तक खुद से कोई शिकायत नहीं है, और न ही आलोचकों की परवाह करते है कहते है मेरे खे का प्रमुख श्री मेरे आलोचकों को जाता है !
वास्तविक सचिन खेल की दुनिया के ही नहीं बल्कि सांसारिक दुनिया में भी महान है आपकी सोच और आपका खेल हर भारतीय को खुश कर देती है!
हम एक अरब भारतीय कामना करते है की एपी रिकार्डो का ऐसा रिकॉर्ड बनाये जो क्रिकेट की दुनिया हमेशा केवल सोचती ही रही !
आप इसी प्रकार हमें अपना क्रिकेट रूपी उपहार देते रहे ! आप ईसी तरह हजारो साल क्रिकेट खेलते रहे !
आपके समर्पण को सलाम ...............................................................................