
संसार के सन्मुख अपनी अत्यधिक बड़ाई करना या किसी बात को अत्यधिक बदकार बताना ही सबसे बड़ी मुर्खता है ! मनुष्य को केवल सत्य ही समाज के सन्मुख प्रस्तुत करना चाहिए ! उसमे अपनी असत्य जोड़ कर मनुष्य एक तो बहुत बड़ा पाप करता है और दूसरा मनुष्यों को भ्रमित करता है ! जो मनुष्य असत्य को साथ लेकर जीवन व्यतीत करता है वो जीवन में असत्यवादी व असफलता की श्रेणी ही प्राप्त करता है ! संसार में यथार्थ सत्य का एक न एक दिन तो ज्ञान होना तय है , तब मनुष्य झूट क्यों बोलते है ! अपने आपको संसार की नजरो में क्यों झुकाते है !अपने एपी को पाप में क्यों डालते है ! मनुष्य नौकरी, पढाई, व्यापर, धन, मकान, आदि क्षेत्रो में लम्बी-लम्बी दंगे हांककर मनुष्य के सामने ही अपनी छवि क्यों ख़राब करते है जिस क्षेत्र में उसे एक भी उन्नति नहीं मिलनी है अतः प्रत्येक मनुष्य यथार्थ सत्य का ही ज्ञान समाज को करना चाहिए ! जिससे समाज में सत्य की प्रतिष्ठा स्थापित होने के साथ-साथ पुण्यो की प्राप्ति होती है !
अंकुर मिश्र''युगल''