कृपया खाने के अपव्यय को रोकिये..............


क्या आपको भरपूर्ण पेट खाना मिल रहा है ????
पर हजारो लोग ऐसे है जिन्हें ये भी नसीब नहीं होता है !
यहाँ सोचनीय यह है की इस स्थिति में बच्चो का क्या हल होता होगा!
यहाँ यह कल्पना आप केवल अपने बच्चो पर लागु करके जन सकते है !
इसी समस्या के थोड़े बहुत निनाद के लिए मै अपने पास आये एक मेल को आप तक स्थानांतरित कर रहा हूँ कृपया पढ़े अवश्य.......
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"अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी / समारोह हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे।
इस अन्न से उन बच्चों का पेट भर सकता है!
हम चुटकुले और स्पाम मेल अपने दोस्तों और अपने नेटवर्क में करते हैं ,क्यों नहीं इस बार इस अच्छे सन्देश को आगे से आगे मेल करें ताकि हम भारत को रहने के लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह बनाने में सहयोग कर सकें -
'मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं ' - हमें अपना मददगार हाथ देंवे ।
भगवान की तसवीरें फॉरवर्ड करने से किसी को गुड लक मिला या नहीं मालूम नहीं पर एक मेल अगर भूखे बच्चे तक खाना फॉरवर्ड कर सके तो यह ज्यादा बेहतर है. कृपया क्रम जारी रखें !!!!!
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For more Help...........
http://www.childlineindia.org.in/

इस बार जापान क्यों नहीं.......


फीफा फुटबाल विश्वकप के परिणाम का समय अब नजदीक आ रहा है आप किसको विजय रथ पर सवार कर रहे है.
अब तो १६ टीमे है अनुमान लगाने में ज्यादा कठिनाई नहीं होगी.....
मै तो इस बार 'जापान' को इस रथ पर देखना चाहता हूँ और आप ?
अब आप सोचेगे जापान ही क्यों,
तब मै कहुगा
''क्योकि वो एक ऐसा राष्ट्र है जो संघर्ष के प्रत्येक पथ पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा है! और उसमे इस कार्य को करने की छमता है
हमारी टीम तो है नहीं तब क्यों न हम ब्राजील व अन्य टीमो को छोड़कर अपने पडोसी को इस रथ पर सवार करें!''
ये मैंने सोचा है जरुरी नहीं सभी की सोच एक जैसी हो!

पुराने ताकतवर नेताओ की गृह वापसी कांग्रेस के सामने एक मुसीबत खड़ी कर सकती है!...


तमाम पुराने ताकतवर नेताओ की गृह वापसी कांग्रेस के सामने एक मुसीबत खड़ी कर सकती है!
अब भाजपा में लगे ग्रहण के समाप्ति का समय आ चुका है.!
अब ऐसा लग रहा है है की पुराने ताकतवर नेताओ के टीम में वापसी से भाजपा पुनः अपने पुराने रंग में दिख सकती है!
क्योकि ये वही हस्तिय है जिन्होंने जनता पार्टी को देश में उसकी शान दिलाई थी!
भाजपा को केंद्र में पहुचाया था!
अतः कांग्रेस सरकार को यदि दोबारा सप्ता में आना है कम से कम अब तो कुछ देश के लिए सोचे!
उसके मंत्रियो व पूरी सरकार ने अपनी कुर्सियों के लिए स्तीफे,संगोष्ठी जैसे खेलो को खूब खेला है लेकिन अब इनसे काम नहीं चलने वाला!
अब तो विकाश ही एकमात्र सहारा है, वही ऐसा ब्रह्मास्त्र है जो देश व सरकार दोनों को विकाश के मार्ग पर ले जा सकता है!!!!!

आतंरिक अंको(Internal Marks) की समाप्ति आवश्यक ..


शिक्षा विभाग को चाहिए की विद्यालय या विशाव्विध्यालय से छात्रो को मिलने वाले आतंरिक अंक (Internal Marks ) को समाप्त कर एक और सराहनीय कदम उठाये !
हाँ इस कार्य में अनेक वधाएँ जरुर आयेगे, अनेक विरोध भी होगे और कुछ छात्र और शिक्षक व्यक्तिगत रूप से आहत भी होगे ,परन्तु यह संख्या पक्ष के लोगो से कम ही होगी और यह कार्य विद्या एवं विद्यार्थी हित में होगा ! वर्तमान में विद्यालय व विश्वविद्यालय में इन अंको (marks) के कारण एक लम्बी राजनीती होती है जो छात्र एवं अध्यापक दोनों के लिए हानिकारक है , कभी इस राजनीती में कोई शिक्षक किसी विद्यार्थी को शिकार बनाता है तो कभी खुद कोई शिक्षक इसमे बलि चढ़ जाता है !
हाँ यह सत्य है की विद्यालय य विश्वविद्यालय में छात्रो व शिक्षक के सम्बन्ध अच्छे होते है पर ये सम्बन्ध सभी के साथ अच्छे नहीं होते है!
कभी कोई शिक्षक किसी विद्यार्थी को किसी व्यक्तिगत कारण की वजह से अंक(marks) कम देकर बलि का बकरा बनाता है तो कभी कोई विद्यार्थी अनेक असम्मानानीय कदमो को उठाकर अच्छे अंक(marks) प्राप्त करना चाहता है जो शिक्षक और शिक्षार्थी के संबंधो की गरिमा को ढेस पहुछाता है !
वास्तविकता तो यह है की कोई छात्र इन आन्तरिक अंको(Internal marks) के लिए कोई मेहनत ही नहीं करना चाहता है बस वो मेहनत करता है तो शिक्षक से अच्छे सम्बन्ध बनाने की जो उसे शिक्षक की नजरो में ले जा सके ! और अच्छे अंक(marks ) दिलाने में सहायता कर सके !
हमें आन्तरिक ह्रदय से सोचना चाहिए की आखिर इन अंको का क्या महत्त्व जिनके लिए इस तरीके की राजनीती खेली जाती हो !
विद्या ,विद्यार्थी और विद्यालय एक ऐसा मंदिर है जहा सरलता ,शीतलता जैसी पूज्य सामग्री को लेकर प्रवेश करते है फिर ऐसा जानते हुये भी क्या हम इसका उपहास बनाए में आनंद प्राप्त करते है वो भी ऐसा उपहास जो हमें खुद को सोचने पर मजबूर कर दे !
अलग अलग सस्थानो द्वारा अलग अलग प्रणाली से आन्तरिक अंक(Internal marks ) प्रदान किये जाते है जिससे कभी छात्र को संतुस्ती तो होती ही नहीं है तब ऐसी स्थिति में हमारी केंद्र एवं राज्य सरकारों के शिक्षा मंत्रालयों को चाहिए की समाज को समाज के सामने अपने आप को पठनीय बनाने वाली शिक्षा को कुछ नया दे उसे ऐसे आवाम प्रदान करे की विद्या इस भ्रष्टाचार से बच जाये !आन्तरिक अंको(Internal marks) को समाप्त करके पूरे मुल्यांकन को वाह मुल्यांकन में परिवर्तन ही इसका एक हल नजर आता है !
इस मुल्यांकन के जरिये वास्तविक प्रतिभाये तो उभर के आयेगी ही साथ में छात्रो में ज्ञान में भी ब्रद्धि होगी !!!!
आशा है हमारी सरकारे इस विचार पर विचार जरुर करेगी !!!!!!!!!!!

हर विधेयक को जनता की मंजूरी जरुरी है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!



हम ऐसे राष्ट्र में निवास करते है जहाँ प्रतिदिन कोई न कोई नियम कानून सरकर द्वारा जरुर बनाया जाता है
ऐसे में हम क्यों न एक ऐसी तकनीक विकसित करे जो प्रत्येक सरकारी विधेयक तक जनता का निर्णय पंहुचा सके !
मेरे व्यक्तिगत विचार से ऐसी तकनीक को हम ATM आधारित तकनीक से ले सकते है !
वर्तमान में हमारी जनगणना 2011 चल रही है जिसके बाद एक राष्ट्रिय पहचान पत्र बनाने की बात कही गयी है ! हमारी सरकार को चाहिए की वह इस पहचान पत्र में थोडा सा सुधर करके इसे थोड़ी मेमोरी देकर एक ''ATM'' कार्ड का स्वरुप दे देदे इस कार्ड में व्यक्ति की जानकारी हो जो राष्ट्रिय पहचान का कम करे औत यह वोटर कार्ड का भी का कम करे तथा इसके जरिये हमें ऐसी मशीन लगानी चाहिए जिसके जरिये हम किसी विधेयक में अपनी प्रतिक्रिया दे सके !!!!
हाँ हमें मशीन लगाने में दिक्कत हो सकती है पर इससे हमें अनेक लाभ होगे ......
1.) हमारी जनता सरकारी निर्णयों एवं विधेयको पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है !
2.)हम इस मशीन के जरिये देश के बार बार होने वाले चुनावो के खर्च को कम क्या बहुत कम कर सकते है !
3.)किसी सामूहिक समस्या को हम सामूहिक rup से सरकार तक पंहुचा सकते है !
4.)इस कार्ड में हमारी साडी जानकारी हो जो सुरक्षा व्यवस्था में हमारी सहायता करे !
इसके आलावा भी अनेक लाभ होगे जो हमें इस तकनीक को सुरु करने के बाद दिख सकते है !
अतः मै सरकार से निवेदन करुगा की इस छोटी सी पहल पर विचार जरुर करे !!!!

हमारी सरकारे समस्यायों का समाधान जल्दी कर सकती है पर नहीं.....


जब देश गरीबी व भ्रष्टाचार जैसे कष्टों से गले मिला कर चल रहा हो और देश कि मौजूदा सरकार मुद्रास्फीति दिखाकर लोगो के घावो में मरहम लगा रही हो , तब ऐसी स्थिति में मौजूदा विपक्ष कि स्थिति अत्यंत मजबूत होनी चाहिए ,लेकिन आज जो दशा हमारे देश के विपक्ष कि है वह अत्यंत दयनीय है इसके सभी सदस्य आपस में ही युद्ध में व्यस्त है तब ऐसी स्थिति में हमें देश के लिए कुछ करना चाहिए अथवा नकारात्मक परिणाम हम जानते ही है !
लेकिन यदि हप सरकार को सुधरने का प्रयास करते है तो उसके पास ''बहु मत'' है हमारा उस पर प्रभाव शायद ही पड़े अतः ऐसी स्थिति में हमें विपक्ष को मजबूत करना चाहिए जिससे हमारा देश गर्त में जाने से बच सके !
विपक्ष को मजबूत करने से सरकार द्वारा लाये गए जबरन विधेयको को स्वीकृति नहीं मिलेगी और जन समूह को इसका लाभ मिलेगा !
आखिर हमें बोफोर्स घोटाले , भोपाल गैस आपदा के परिणाम भी चाहिए ! हमें हमारी महगाई के कारण चाहिए ! हमें उनके लिए न्याय चाहिए जिन्होंने मुंबई बम ब्लास्ट में जाने दी !यह सब हम लगातार देख रहे है और साथ ही हम यह भी देख रहे है कि आज देश के सबसे सुरक्षित व्यक्तियों में "अजमल कसाब और अफजल" जैसे लोग है जिन्होंने देश कि सुरक्षा ही ख़त्म कर दी !
क्या हमारी सरकारे इन समस्यायों का समाधान जल्दी नहीं कर सकती है पर नहीं !
क्या हमारी सरकार उसी खर्च को बचाकर देश हित में नहीं लगा सकती है पर नहीं !
पर हमें ऐसा ही करवाना होगा यदि हमें समाज में अपने आप को और विश्व में अपने भारत को देखना है तो !
इस कार्य के लिए प्रथम प्राथमिकता हमें अपने विपक्ष को मजबूत करना है उन्हें किसी तरह संगठित करना है और उनसे देश हित में कार्य करवाना है !!!!
अथवा भविष्य के परिणामो कि कल्पना आप खुद आज से कर सकते है !!!!!!!!

उस संसद का अपमान है जिसके नियम कानून से हम चलते है..........


हमारा भारत आज पूर्ण रूप से स्वतंत्र है और यहाँ के हर नागरिक, कर्मचारी को सोचने , विचार करने एवं निर्णय लेने का अधिकार है तो फिर क्या वे संसद सदस्य भारत के निवासी नहीं है जिनको राज्य सभा से मात्र स्वविचार के कारण निष्कासित किया गया ! ये भाजपा , कांग्रेस ,सपा,माकपा , बसपा या किसी राजनैतिक पार्टी का अपमान नहीं बल्कि ये उस संसद का अपमान है जिसके नियम कानून से हम चलते है हम जानते है महिलाओ को बराबर का दर्जा मिलना चाहिए पर इसके लिए किसी को जबरन मनवाना तो गलत है ,वो भी उससे जो किसी भी अधिनियम में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखता है ! उन सदस्यों को बिल में कोई कमी महसूस हुई होगी या वो उसका पक्ष नहीं लेना चाहते होगे तो उन्होंने अच्छा ही तो किया खुला विरोध किया ,आखिर विपक्ष की भूमिका भी तो यही है !जब बिल के पक्ष में मतदान करने वाले बाद में कह सकते है कि बिल राष्ट्र हित में नहीं है इससे पिछड़ा वर्ग को कोई सहायता नहीं मिलेगी यह तो केवल राजनेताओ के परिवार कि महिलाओ को और उठाने कि एक पहल है और खुद कांग्रेस व् उसके गठबंधन के सदस्य अब बिल के पक्ष में नजर नहीं आ रहे तो क्या अब उनको भी निलंबित किया जायेगा !
जो भी परिणाम निकले बिल पूर्ण रूप से पास हो या न हो पर उन सदस्यों के साथ तो अन्याय ही हुआ है!
पर यहाँ से एक संका और होती है कि कही एक और बिल कि तयारी तो नहीं हो रही ! हाँ मै ऐसे बिल कि बात कर रहा हु जिसमे किसी भी अधिनियम का विरोध करने वाले सदस्यों को निलंबित करने का प्रयोजन हो जिसका परिणाम जानने के लिए माननीय सभापति महोदय ने ''डेमो'' किया हो!
जो भी हो सभी को आशा है कि कोई भी राजनेता हमारे संविधान से खिलवाड़ करने का दुस्साहस नहीं करेगा !!!!!!!!

खुली चुनौती देता हमको ,बदता हुआ अँधेरा---- अंकुर मिश्र'युगल'

खुली चुनौती देता हमको ,बदता हुआ अँधेरा,
पल-पल दूर जा रहा हमसे ,उगता हुआ सबेरा !
निशा नाचती दिशा दिशा में ,उडी तिमिर की धूल,
अपना दीप जलना होगा ,झाझा के प्रतिकूल !!


आत्मा की चिर दीप्त वर्तिका को थोड़ा उकसादो ,
मांगो नहीं ज्योति जगती से , लौ बन के मुस्कुरा दो !
जगमग जगती के उपवन में,खिले ज्योति के फूल,
माथे से फिर विश्व लगायें ,इस धरती की धूल!!
अमा,क्षमा मांगे भूतल से ,भगे सघन अँधेरा,
अवनी का अलोक स्तम्भ बन ,जगे भारत मेरा !
आर्य संस्कृति के परवाने ,आओ सीना ताने ,
दीप बुझाने नहीं ,ज्वलित पंखो से दीप जलने !!
तब समझूगा तुम जलने की , कितनी आग लिए हो,
और दहकते प्राणों में , कितना अनुराग लिए हो!!!!!!!!

अब तो जागो भाइयो ....अंकुर मिश्र ''युगल''

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तोड़ मोह के पाशों को,
भर लो वक्ष स्थल में आग |
अब समय नहीं है सोने का ,
राम पुत्र तू जाग जाग ||
बन पांचाली का क्रोध महा ,
बन जा तू ज्वाला प्रचंड |
अरिदल रण को छोड़ भगे ,
हो जाये उनका मान खंड ||
चारो दिशाएं गूंज उठे ,
ऐसा हो तेरा युद्ध राग |
अब समय नहीं है सोने का ,
राम पुत्र तू जाग जाग ||
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हाय रे परिवर्तन ...........


मेरे पूज्य बाबा श्री श्री धर मिश्र जी द्वारा 8 दिसंबर १९५० को जब यह कल्पना की गयी थी की एक मानव को ऐसी भी
जीवन यात्रा करनी पड़ेगी की जिसमे उसका ह्रदय ही केवल उसका साथ देगा शेष सांसारिक दिखावट केवल दिखावट ही रह जाएगी तब बाबा को ''कवि सम्मलेन'' में महत्व नहीं दिया गया और उनका मजाक उड़ाया गया !
पर आज की दशा देख कर तो लग रहा है की मानव का ह्रदय भी उसके साथ नहीं है और वह मात्र एक पुतला बनकर रह गया है
उनकी उस कविता को मै यहाँ प्रकाशित कर रहा हू !
आशा है की आप इसे पड़कर उस ''सत्य'' की अनुभूति करेगे जिससे ''आप और हम '' महशूश रहे है.!
यदि उसमे आप को भी कोई त्रुटी मिले तो आप कृपया मुझे दोष दीजियेगा मेरे बाबा को नहीं क्युकी मैंने इसे पब्लिश करने की अनुमति बाबा से नहीं ली थी, लेकिन आज की दशा देखकर और इस कविता में समानता देखकर मै इसे पब्लिश करने से अपने आप को नहीं रोक पाया !
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वाही आशा के झिलमिलाते तार,
निराशा की टूटी झंकार,
प्रणय के गीत मिले अनमोल,
उसी में मिली प्यार की पीर,
झूलता सा एक पागल मन,
ने पाया पलकों कुछ नीर !!
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बासते बदल छितराए,
अरे घर सावन ही आयें,
लगे होने आनंदाचार,
पधारी अल्वेली सुकुमार !!
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छुपाये नयनो में एक प्यार,
दवी आशाओ के ही मर,
''न ठहरा लेकिन यह कुछ दिन
मांग सिंदूर भरी वैरिन !!
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वही अलको के सुखमय घन,
अभी जो बरसाते थे प्यार,
आज मसकन से विथराए,
समेटे आशा का श्रंगार !!
..................
शेष रह गया ह्रदय साथ ,
लगा जब परिवर्तन का हाथ !!!!!!!!!