बड़े शर्म की बात है !! अंकुर मिश्र "युगल"


दुश्मन आज आदम खान हो गया है,
बच्चा बुढा लहू-लुहान हो गया है!
हम रेड-अलर्ट घोषित करते रहे ,
जन्नते कश्मीर वीरान हो गया है !!
रोयें दादी माँ की नानी !
ये बड़ी शर्म की बात है !!
मुगलाते में तांडव करवा डाला,
पूरा सरहदी क्षेत्र चार्वा डाला!
कड़ी सुरक्षा रेड-अलर्ट के चलते,
लाखो निर्दोषों को मरवा डाला!!
थर थर कांपे मर्दानी!
ये बड़ी शर्म की बात है!!
फिर दुश्मन का हौशला बाद आया ,
एक रोज लाल किले में घुस आया!
राष्ट्रिय गौरव में दाग लगाकर ,
संसद में मिलने का सन्देश भिजवाया!!
नींद में रहे राजधानी !
ये बड़े शर्म की बात है!!
वह से भी उसका मन नहीं भरा,
पानी अब सर के ऊपर चढा!
बम्बई में अतिक्रमण बर्शाया,
हमें खून के अंशु रुलाया !!
पापी से पूंछे उसका पाप !
ये बड़ी शर्म की बात है !!
गणतन्त्र दुबका सहमा रह गया ,
आतंक बाद अपना काम कर गया !
रह में थी कश्मीर विधानसभा,
जिसमे बम बारूद और धुँआ भर गया !!
कातिल से पूछे उसकी निशानी !
ये बड़ी शर्म की बात है!
बीत गए जाने कितने मधुमास,
भूल गए अभिमान भरा इतिहास!
बलिदानों की गाथा निरर्थक गयी,
जहाँ में हो रहा हमारा उपहास !!
डूबने को नहीं "अंकुरित" हो रही जमीन!
ये बड़ी शर्म की बात है !!