"रोबोट" के साथ एक नए युग की शुरुआत !!!!अंकुर मिश्र "युगल"



आज देश को विकास के लिए जिन महत्वपूर्ण तथ्यों की जरुरत है,उनकी पूर्ति के लिए हमारा "बालीबुड" भी आगे आता नजर आ रहा है !हाल ही में आयी "शंकर जी " के निर्देशन एवं "रजनी कान्त" के अभिनय की फिल्म "रोबोट" के जरिये जो चलचित्र समाज को दिखाया गया है इससे हमें कुछ सोचने पर विवस जरुर होना पड़ता है वो अलग बात है की विश्व के अनेक सिनेमा ऐसी फिल्मो को बहुत पहले से दिखाते आ रहे है ,परन्तु हमारे भारत में ये ऐसी पहेली फिल्म है जिसमे मानव, तकनीक के बारे में जरुर सोचेगा !दशको से चली आ रही बालीबुड जिसने अभी तक अधिकतर "प्यार","मोहब्बत" वाली फिल्मो का ही निर्माण किया है उसने "रोबोट" को बनाकर बालीबुड की नयी नीव राखी है !फिल्म के जरिये जो प्रदर्शन किया गया है वास्तव में सराहनीय है ,"इलेक्ट्रोनिक्स के प्रयोग से अभिनेता जिस तरह एक मानव सामान आकृति को तैयार करता है जो बाद में एक गलत आदमी के हाथ में पहुच जाने के कारन मानव की ही दुश्मन बन जाती है,सोचने के लिए बिबस जरुर करती है ,हमारे छोटे-छोटे बच्चो को फिल्म से बहुत कुछ सिखाने को मिलता है !
मै यह नहीं कह रहा की यह विश्व स्तर बहुत अच्छी फिल्म है, मै तो यह कह रहा हु की यह फिल्म भारत के लिए बहुत ही अच्छी है ,आधुनिकता का सन्देश ,आज पर विज्ञानं की पकड़,विज्ञानं के गलत स्तेमाल का नतीजा एवं भ्रष्टाचार रूपी अभिशाप को फिल्म ने दिखाकर एक मिशाल कायम की है जो शराहनीय है !!!!

सर्वश्रेष्ठ करने का सर्वश्रेष्ठ मौका !! अंकुर मिश्र"युगल"



३ अक्तूबर में प्रवेश करते ही हमारे इतिहास में नया इतिहास जुड़ने को तैयार खड़ा है,आज हम उन खेलो के आयोजन की सुरुआत कर रहे है जो हमरे लिए अदुइतीय है जिसमे १-२ नहीं बल्कि ७१ देशो के लगभग ५००० खिलाडी अपने अपने राष्ट्रों के लिए संघर्ष करेगे !
जब हमें इन खेलो के आयोजन की जिम्मेदारी सौपी गई थी तब से अब तक विश्व के कुछ राष्ट्रों को छोड़कर सम्पूर्ण विश्व ने हमारी निंदा की ,हमारे ऊपर टिप्पणिया की !पर वो शायद भूल गए हम वही "सोने की चिड़िया" वाले हिन्दुस्तानी है जिसने कभी आपका पेट "पला" है ,आपको ज्ञान दिया है ,आपमे सदाचारो का "अंकुरण" किया था ,और आज वो हमसे ही आंख मिलाने की कोशिश कर रहे है !हमारे १९५१ब के खेलो को भूल गए क्या !!
विश्व के वासियों हमारे काम करने के तरीके को समझो हम किसी काम का ढिंढोरा नहीं पीटते हमारे परिणाम हमारे कार्य को सर्वश्रेष्ठ सिध्ध करते है,और बताते है की हम वही अर्यवासी है !
और मै यहाँ यह बताकर ढिंढोरा नहीं पीट रहा बल्कि वास्तविकता बता रहा हूँ ! हमारे "राष्ट्र मंडल" खेल सर्वश्रेष्ठ होगे हमारी सुरक्षा को ढीला समझने वाले राष्ट्रों को पता होना चाहिए हम "शांति" प्रिय है, हमारा पहला हथियार "अहिंसा" है ,परन्तु अब यहाँ जरुरत पड़ी तो हम अपने दूसरे हथियार "हिंसा" का उपयोग हमारी शांति के विनाशको के ऊपर जरुर करेगे !
हम अपने राष्ट्र मंडल खेलो को सर्वश्रेष्ठ बनायेगे, हम १३० करोण भारतीय उन ५००० प्रतिभाओ का उत्साहवर्धन करेगे!हम सब उनके साथ है आज देश में हर नागरिक के अन्दर जोश और जज्बे का जो संग्रह है उससे हम निहाल हो जायेगे !

आज देश का प्रत्येक नागरिक मौका मिलने पर अपनी "भ्रष्टता" दिखने में माहिर है !!!!


अरे कब तक सुनेगे अपनों से ही की हमारा देश भ्रष्ट है ,हमारे neta भ्रष्ट है ,हमारा प्रशाशन भ्रष्ट है !, और यदि हैं भी तो बता किससे रहे हो उन्ही से जो इस कड़ी का एक हिस्सा है !आज यही तो समस्या है की खुद ने खुद को सोचने पर बिवस कर दिया है,देश के लोकतंत्र,प्रजातंत्र यहाँ तक की एक सामान्य मनुष्य ने भी इस जीवाणु से अपने अप को नहीं बचा पाया है!अरे हम विश्व में किस मामले में पीछे है १३० करोण लोग हमारे पास है जो विश्व की लगभग १७% जनसँख्या है ,हमारे पास सभी कच्चे पदार्थ प्राप्त होते है ,हम खनिजो से परिपूर्ण है ,हम प्राचीनतम विश्वगुरु है ,हम प्राचीनतम धनाड्य है फिर भी हम खुद से खुद में ऐसे जीवाणु को फैला रहे है जो देश के विनाश का मार्ग है ,और वास्तविकता पर ध्यान दे तो आज देश का हर नागरिक ,हर बच्चा मौका मिलने पर इस जीवाणु से हाथ जरुर मिलाता है !
सोचिये भ्रष्टाचार न होता तो "कला धन" जैसे शब्द आपको सुनाने को भी नहीं मिलता !अरे अप इस कड़ी से जुड़ते क्यों है अपने कार्य को जल्दी और सामान्य ढंग से बनाने के लिए , अप यही कार्य नियम-कानूनों के दायरे में रहकर करिए फिर देखिये आपको कितने लाभ प्राप्त होते है आपका धन बचेगा,आपका समय बचेगा ,आपकी प्रतिष्ठा बनेगी,आप विक्सित भारत को बनाने में अपना सहयोग देगे !!!!
अरे आप सुरुआत तो करिए सकारात्मक परिणाम आपको नजर आने लगेगें ! और जिस दिन इस ऐतिहासिक काम की सुरुआत हो गई उस दिन से ट्राफिक में खड़े हवलदार से लेकर देश को चलाने वाली बड़ी से बड़ी शख्शियत में इतनी ताकत नहीं होगी की वो "भ्रष्टता"के गलियारे घुसने की कोसिस कर सके!! और आज के भारत को देखते हुए हमें पूरा विश्वास है की वो दिन जल्द ही हमारी आँखों के सामने होगा ,क्योकि आज की युवा पीढ़ी में देश के उत्थान का स्वप्न साफ झलक रहा है!!!!!!!!!!

जनता मात्र वोट बनकर रह गई है आज की राजनीती में- अंकुर मिश्र"युगल"


एक विचार आपके विचार के लिए......
जी हा अब फिर एक तातीजा आ रहा है हमारे लिए "अयोध्या का फैसला" !अरे आज हम हिन्दू- मुसलमान एक दुसरे के इतने दुश्मन नहीं है जितनी हमारी सरकार हमें बनाती जा रही है! यदि वर्तमान की गतिविधियों को देखे तो सब शांति से चल रहा है कोई किसी परेशानी में नहीं है सिवाय महगाई के,वो भी हम हँसते हँसते झेल रहे है ,लेकिन अयोध्या मामले का फैसले की खबर से पुनः अशांति फ़ैलाने जो की कोशिश हमारी सरकार कर रही है वह वास्तव में "आज की भारतीय राजनीती" पर सोचने के लिए विवश करती है ! वो भी दशको से पड़े इस मामले का परिणाम तब देगे जब "हमारे स्वर्ग जैसे कश्मीर में परेशानिया छायी हुई है ", "कुछ ही समय बाद हम राष्ट्रमंडल खेलो का आयोजन करने जा रहे है ",क्या हमारी सरकार य न्यायलय को और कोई समय नहीं मिला था जिसमे इस परिणाम की तिथि घोषित कर सके ,अरे हम यही सोच लेगे की हमारा मंदिर या मस्जिद थोड़ी विलंभ बना ! पर विश्व में हमारी छवि तो बनी रहेगी हम खेल तो शांति पूर्वक निपटा सकेगे! हाँ यहाँ दूसरा ध्यान देने वाला बिंदु यह है की आखिर अयोध्या में सेना को लगाकर सरकार दिखाना क्या चाहती है,देश की सेना विदेशियों से सुरक्षा के लिए है या आपस में लड़ने के लिए !और हाँ देश के अन्दर हमें सुरक्षा की आवश्यकता खुद के लिए नहीं अपितु उनके लिए है जो हमारे यहाँ अपनी प्रतिभाओ का प्रदर्शन करने आ रहे है !!
यह तो केवेल एक बिंदु था जहा यह सिध्ध होता है हमारी सरकार हमारे साथ जब चाहे अपने वोटो का कोटा बढ़ने के लिए कुछ भी कर सकती है जो पूर्ण रुपें दृशनीय है !
आप किसी भी सरकारी क्रियाकलाप से ये देख सकते है की हम केवल वोट के लिए प्रयोग किये जा रहे है,वो चाहे नेताओ के चुनाव से पहले विकासक के वादे हो या फिर चुनाव के बाद की नेतागिरी !
अरे आप खुद सोचिये की.....
>> क्या वो धन वापस आया है जिसके लिए चुनाव से पहले वादा किया गया था (मेरा मतलब कला धन) !
>>क्या दशको से पड़े उन गरीबो का कुछ हुआ जो चुनाव में हमेशा भाग लेते है(उनका विकाश)!!
>>क्या उन नेताओ का कुछ हुआ जो हमारी माँ, बहनों को सताकर परिवार जानो को लूटकर मंत्रिमंडल में पहुछे है और जिनको कभी मंत्री पद न देने की बात कही गई थी!!!
>>अरे उनके लिए भी सोचिये जो अपनी जन को हमेश अपनी हंथेली पर लिए रहते है वो भी इस लिए की हमरे राजनेताओ,उद्योगपतियों को कुछ न हो, अरे उनके परिवार जानो के बारे में तो सोछो हमारे आकाओ!!!!
>>राजनीती की परिभाषा को यद् करो ,हाँ सब जानते है की किसी साम्राज्य के लिए महत्व पूर्ण इकाई है ,पर यद् करिए उसमे यह भी है यही वो शब्द है जो दो विभिन्न साम्राज्यों को संगठित करता है न की अपश में लड़ता है !!!!
इत्यादि हमें ऐसे अनेक बिंदु मिल जायेगे जो हमारी राजनीती को गर्त में पहुछा रहे है !
आप सोचेगे की इन बिन्दुओ को तो सब जानते है , हाँ सत्य भी है पर आप एक बार गंभीरता से विचार करिए आपको कुछ नकुछ कमी जरुर नजर आयेगी!
आशा है आप इस विचार पर विचार जरुर करेगे...

"घोर कलयुग का सामना करती राष्ट्रभाषा के विचार"..



आज मै इस तरह से अपने ही घर में लज्जित हो रही हो की किसी के सामने अपने दर्द का व्याख्यान भी नहीं कर सकती !पहले तो मुझे इस बात का कष्ट रहता था की आतंकवाद, नक्सलवाद अदि मेरी माता को लगातार कष्ट दे रहे है, लेकिन उस दर्द का एहसास मुझे नहीं होता था ! अज जब लोग मुझे ही मारने लगे तो मुझे लगा की देश पर आज वास्तविक खतरा मधरा रहा है !और उस कष्ट की अनुभूति हुई जो मेरी मातृभूमि सदियों से सह रही थी ! जब श्री अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में मेरे दर्शन सम्पूर्ण विश्व को कराये थे तो मुझे लग रहा था की मै भी अब इस सखा की सदस्य बन जाउगी !
लेकिन आज की इस व्यस्ततम दुनिया में मुझे नहीं लगता की मेरा वह सपना कोई पूरा कर पायेगा !जो करने वाला था वो असमर्थ हो गया है और जिसको सौपा गया था उसने मेरा विनाश करने की ठान रखी है! मुझे आज मेरी जन्मभूमि में ही कोई सरन देने वाला नहीं है कोई नहीं है जो मेरी दुःख भरी किलकारियों को कोई सुन सके !सब के सब मुझे कष्ट देने में लगे है.....................................................

आखिर इनकी क्या इच्छाए है जो ये मेरी बलि चढा कर पाना चाहते है !यदि ये मेरी वजह से कष्ट में है तो मुझसे कह दे तो मै अपने भाइयो,माताओ, गुरुओ,और देश्वशियो के लिए अपना भी बलिदान कर दुगीं ! lekin मुझे ऐसा भारत चाहिए जो विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र हो जिश्मे तनिक भी बधाये न हो !
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"घोर कलयुग का सामना करती राष्ट्रभाषा के विचार"
प्रस्तुतकर्ता-- अंकुर मिश्र ''युगल''
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अरे हम बंदी किसके थे जो हमें कोई आजाद करेगा हमने तो उन्हें केवल व्यापर के लिए चंद समय और जगह दी थी..

अरे हम बंदी किसके थे जो हमें कोई आजाद करेगा हमने तो उन्हें केवल व्यापर के लिए चंद समय और जगह दी थी...


आखिर आ ही गया हमारी स्वतंत्रता का ६४वा वर्ष !
चलिए हम जरा विचार करते है की हमने , हमारे भारत के लिए इन ६४ वर्षों में कितने महान कार्य और कितने सराहनीय कार्य किये है, जिनसे हमारा और हमारे मुल्क का विकाश हुआ है!
जी हा हम कह रहे है अब ६४ वर्ष जो अब बीत चुके है जो बहुत ज्यादा होते है, आजकल तो एक मनुष्य की उम्र भी नहीं होती इतनी ....
फिर भी हम उनसे पीछे क्यों है, क्या हमारे पास संसाधनों की कमी है ,क्या हमारे पास तकनीक की कमी है ,क्या हमारे पास दिमाग की कमी है ,क्या हमारे पास शक्ति की कमी है???नहीं हम किसी में भी काम नहीं है !हम एक अरब से ऊपर है जो महान शक्ति का प्रतीक है ,विश्व के सर्वोच्च कोटि के डॉक्टर ,इन्जीनिअर,प्रयोग्शाश्त्री यही से होते है जो महान दिमाग के उत्पत्ति के सूचक है ,विश्व के महान तकनिकी संस्थानों के नायक भारतीय है जो महान तकनीक का सूचक है जब हमारे पास इतना सब है तो हम उनसे पीछे क्यों है !
और छोडिये आज जिस कम्पूटर पर सारा विश्व चलता है उस कम्पूटर को चलने वाला"शून्य" हमारी ही देन है,इस विश्व को पढना -लिखना किसने सिखाया है -हमने ,तभी तो हम एक समय पर विश्व गुरु थे और आज नहीं है इसका कारण क्या है !!!!!!!
क्या आपको नहीं लगता की केवल हमारे विचारो के कारण ही हम विश्व से पीछे है एक समय पर हम विश्व गुरु थे और आज हम सैकड़ो में भी नहीं आते !
एक समय पर हमारे पास वो अस्त्र - शश्त्र थे की हम पूरी दुनिया को हिला सकते थे और आप अपनों से ही हिल रहे है ! इस दुनिया को हमने ही उस श्रृंखला में लाके खड़ा किया है की वो अपने अधिकारों को ले सके हाँ ये सत्य है की उसने हमें छल से घायल कर दिया था पर यह तो सोचनीय है की ६४ वर्ष में तो अच्छा से अच्छा घाव सही हो जाता है फिर हम तो केवल चोटिल थे अरे आप और छोड़िये अपने पडोसी "जापान" को देखिये वो तो मृत्यु के दरवाजे से निकला था पर आज पूर्ण रूपेण विकसित है हाँ वहा के लोगो में अभी तक घाव है पर उन्होंने अपने देश के घाव को सही कर दिया !
अरे हम उसी को आदर्श बना कर चल सकते है आखिर हमारा अच्चा दोस्त है वो!
वहां भ्रष्टाचार नहीं होता ,वहा के नेता अपने देश का धन दुसरे देशो में जमा नहीं करते ,वहां के नागरिक दुसरे को पतन पर नहीं बल्कि खुद को उन्नति के मार्ग ले जाने का प्रयास करते है ,वहा वर्ष में हजारो चुनाव नहीं होते,अरे वहा हर उस मार्ग को चुनते है जिससे आज के आवश्यक तथ्य "समय और धन" की बचत हो सके और उसका उपयोग अन्य किसी कार्य में कर सके !आखिर ये संभव कैसे है --- केवल और केवल उनके विचारो के कारण उनके विचार उनके देश के साथ है वो देश को सोचकर कोई कदम उठाते है !क्या वो कुछ अलग करते है ,क्या वो खाना नहीं खाते ,क्या वो सोते नहीं है ,क्या वो लड़ते नहीं है ??????
जी नहीं ये सब उनके यहाँ भी होता है अरे ये तो दैनिक जीवन के क्रिया कलाप है सब कोई करता है !!!!!!!! हाँ पर ये तथ्य है की वो केवल इन्ही कारणों से सबसे आगे है क्योकि वो सभी कार्य एक अलग तरीके से करते है ;उनका कार्य को करने का हर तरीका अलग होता है !अद्वितीय होता है!!!!!!!!!!
जी हा ये सब हम भी कर सकते है और सारे तरीके हमारे पास भी है क्योकि हमारे पूर्वजो से ही इन्होने लिए है.....लेकिन आज समस्या यही है की अह हम खुद को भूल चुके है और इसी का परिणाम हमारा देश और हम भुगत रहे है ,और हमी कहते है हम आजाद नहीं है """अरे हम बंदी किसके थे जो हमें कोई आजाद करेगा हमने तो उन्हें केवल व्यापर के लिए चंद समय और जगह दी थी पर ये "सत्य" है की हमारे विचारो को कुलीन इसी समय ने किया है !!!!!!
हाँ यदि हमने अभी से ही अपने विचारो पर विचार करना सुरु कर दिया तो विश्व की कोई ताकत हमसे आँगे नहीं हो सकती....

अभी इतने भी प्रागैतिहासिक मत बनो यारो की कल के बलिदानों को ही भूल जाओ ......


अभी इतने भी प्रागैतिहासिक मत बनो यारो की कल के बलिदानों को ही भूल जाओ ,अरे काम से काम उन्हें तो याद कर लो जिनके कारण आज तुम खुले असमान के नीचे खेल रहे हो !!!!!!!!!!!!!!!!!
....बैलेंटियन दिवस ,मैत्री दिवस य और कोई ऐसा ही दिन होता है तो भारत के महान निवासी एक-दुसरे को बढ़िया देने में जुट जाते ,वो भी एक-दो दिन पहले नहीं बल्कि पंद्रह बीस दिन पहले से !जी हा यही कार्यकलाप है हमारा !!!!!!!
हम बात कर रहे है हमारे स्वतंत्र भारत की वर्षगांठ की जिसके मात्र ५-६ दिन शेष है उसकी किसी को चिंता नहीं है ,लोग सोचते है आने दो उस दिन झंडा लहरा लेगे ,लोगो से पुराना इतिहास सुन लेगे,लालकिला पर प्रधानमंत्री का भाषण सुन लेगे बस हो गया १५ अगस्त लेकिन हमारी महान हस्तियों जरा ये भी तो सोचो की इस १५ - अगस्त को मानाने के लिए हमें कितनी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ी है क्या यही कठिनाइया आपके बैलेंतियन दिवस य मैत्री दिवस को मानाने के लिए झेलनी पड़ी है ,मई बताता हु जी नहीं !!! इन सब दिवसों के कारणों पर जायेगे तो पता चलेगा की कोई दिवस इस्सलिये मनाया जाता है की इसनइ इसको शादी के लिए आमंत्रित किया था ,जैसा की आज भी करते है !!
किसी दुसरे दिवस पर जायेगे तो पता चलेगा की वो इस दिन समुद्र में कूड़ा था ,जैसा आज भी होता है ,, रहा होगा कोई कारन.........
किसी अगले पर जाते है तो पता चलेगा की इस दिन उसका लड़का पैदा हुआ था जैसा की आज भी होता है !!
तो फिर आज क्यों नहीं सुरु कर देते इन दिनों को धूम धाम से मानना ....
मनाओ हम ये भी नहीं कहते है की अप इन्हें बिलकुल ही मत मनाओ बल्कि हम तो यह कह रहे है की अरे जिसे मानाने के लिए हमने 350 साल लड़ाई लड़ी है पहले उसे याद करो ...अरे ये दिन न होता तो जो अप आज मन रहे हो न वो सब धरा का धरा रह जाता ..

एक क्लिक से आप किसी की भूख मिटा सकते है.....


आज फिर से उसी गहन समस्या पर पुनः एक प्रयाश करने ही कोशिशि कर रहा हूँ!
जिसकोप्राप्त करने के लिए कुछ असहाय लोग बराबर प्रयासरत है हैं और तो और तमाम सरकारी संगठन भी लगातार अनेक तरीको से लोगो को इस विसम विपदा से निजात दिलाने में संघर्षरत है!!!!!!!!!!!!!!!
जी हा मै बात कर रहा हूँ ''भूख'' की जिससे लगभग ७००० लोग प्रतिदिन अपना जीवन गवां देते हैं !
क्या हम उनके लिए थोडा भी प्रयाश नहीं कर सकते है,
हम उन्हें खाना देने की अवस्था में नहीं है तो क्या हम लोगो को प्रोत्साहित नहीं कर सकते ताकि जो इसके काबिल हैं वो तो इसमे अपना हाथ बटाएं !
और हम काबिल नहीं है तो हमारे पास अनेक तरीके हैं जिनके जरिये हम भी उन लोगो तक भोजन पंहुचा सकते है जिनको हमसे ज्यादा जरुरत है !
जी हाँ आज मै एक ऐसे ही तरीके की बात यहाँ कर रहा हूँ
यदि आप प्रतिदिन http://www.bhookh.com/ पर क्लीक करते है तो इस वेबसाइट के माध्यम से उन असहाय लोगो तक हम भोजन पंहुचा सकते है !!!!
जी हा यह एक NGO है जो ऐसा करता है !
तो क्या हम उन असहाय लोगो की सहायता के लिए हम अपनी उंगलियों को भी नहीं हिला सकते है ,
यदि इस कार्य को करने में भी सक्षम नहीं है तो धिक्कार है हमारे इस जीवन को और इस मानव शारीर को !!!!

आखिर कब तक बलि चढ़वाने का इरादा है हमारी सरकार का !.....


पिछले कुछ वर्षो से लगातार नक्सली हमलो से मरने वालो की सख्या हजारो में पहुँछ गई होगी! लेकिन इससे निजत का आज भी सरकार को कोई उपाय नहीं सूझ रहा !
हाँ हो सकता है हमारी सरकार यहाँ भी पं. जवाहर लाल नेहरु जी के शांति के समझौते को लागू कर रही हो!
वो नक्सलियों को सन्देश दे रही हो की आप हमला करो हम जबाब नहीं देगें !
लेकिन सरकार को यह तो समझना ही चाहिए की नक्सली यहीं से पैदा हुये है और उन्हें मालूम है हमारी नीतियाँ क्या है ,हमारी शांति की नीति भी उन्हें मालूम है!
और सोचनीय तो यह है की वो हमारे खिलाफ हथियार उठाने वाले है और क्या उन्हें शांति की परिभाषा भी आती होगी !
जो हम उन्हें लगातार शांति के और प्रत्यर्पण के सन्देश दे रहे है!
खुले रूप से कहा जाये तो नक्सलवाद आज भारत में आतंकवाद का रूप ले चुका है !
यहाँ भी यही सोचनीय है की आतंकवादी भी अपनों को कभी घात नहीं पहुचाते पर ये तो अपनों को समाप्त करने पर तुले है!
तब इन्हें क्या आतंकवाद और नक्सलवाद की संज्ञा भी सही है ! मेरे हिसाब से नहीं !!!!!!!!!!!!!!!!
आखिर इससे ये प्राप्त क्या कर लेगे ,क्या ये सरकार को चुनौती दे रहे है या समाज में अपना भय व्याप्त कर रहे है ये तो वही जानें//.
पर यहाँ हमारी सरकार को सही कदम उठाने की जरुरत है सरकार को खुद के भविष्य की नहीं तो जनता के भविष्य की चिंता तो करनी ही पड़ेगी ,उन सेनानियों की चिंता तो करनी ही पड़ेगी जो मंत्रियो जैसी विशाल सुरक्षा नहीं रखते है और दूसरो के लिए खुद को निक्षावर कर देते है ! वही सिपाही व सेनानी प्रतिदिन सहीद हो रहे है और सरकार उन्हें क्षणिक सम्मान देकर सहीद घोषित कर देती है ! सरकार को उन शहीदों को ही न्याय दिलाने की जरुरत आज के समाज की आवाज है अथवा वो दिन भी दूर नहीं होगा जब हम अपनों के साथ भी चलने में कतरायेंगे!!!!!!!!!!!!!!
वो भी चंद महानुभावो की वजह से जो मानव जाति में अपना भयावह सन्देश भेज रहें है !!!!