न जाने क्यों इतना याद आते है

सुबह की वो छोटी छोटी बातें
छुट्टियों की फिर फिर मुलाकातें
सूरज की रौशनी में जवां इश्क
जिंदगी के बड़े बड़े ख्वाब
और तेरे और मेरे वो अल्फाज
न जाने क्यों इतना याद आते है...
कहीं दूर-दूर घूमने के नमकीन इरादे
कसमो में वो कच्चे कच्चे वादे
तेरी यादो में बिखरे बिखरे दिन
तारीखों के साथ जवां होती उम्मीदे
और रातो के यकीनी सपने
न जाने क्यों इतना याद आते है...
हर गुजरते दिन की यादो से
कोई कहो जरा ठहरो तो
बदलती तारीखों के वक्त से
कोई कहो वक्त बदलो तो
जिंदगी के मेले को कोई बता दो
तुम्हारे बाद खुद भी खो गया हूँ मै यहाँ
और बस तुम इतना सुन लो
तुम्हे बस "प्यार" था मुझसे
मुझे न जाने क्या क्या था की
अब भी खुद को करीने से लगा दूं मै
तुम अब भी,
न जाने क्यों इतना याद आते है...
न जाने क्यों...?



#YugalVani 

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