Sachin Tendulkar Biography ................



Welcome to Sachin Tendulkar biography section of Sachin-Tendulkar.co.in. Sachin Tendulkar biography is so impressive that anyone can get inspired from it. When 16 years old Sachin entered the world of cricket against Pakistan, experts said a lot of things about Sachin Tendulkar height, but tallest of the bowlers have proven short in front of Sachin Tendulkar height. Although Sachin Tendulkar height is 5ft 5 inch but bowlers like Courtney Walsh, Curtley Ambrose and Tom Moody, who are some of the tallest bowlers in Sachin’s era, have received thrashing from Sachin’s heavy bat. With time, Sachin Tendulkar height and stature in world cricket has become tallest.

Sachin Tendulkar profile : If you talk about Sachin Tendulkar profile, he has done everything to make his profile just the perfect one. If any cricketer in the world can include even 1% of ingredients of Sachin Tendulkar profile in his approach towards Cricket, he’ll be a good player, if not great. A short Sachin Tendulkar profile includes following details of Sachin Tendulkar.

Full name: Sachin Ramesh Tendulkar
Father’s name : Ramesh Tendulkar
Mother’s name : Rajni Tendulkar
Sachin Tendulkar birthday : April 24, 1973 , Bombay (now Mumbai)
Current age 36 years 150 days (as on 21 Sep 2009 )
Major teams: India , Asia XI, Mumbai, Mumbai Indians, Yorkshire
Nickname: Tendlya, Little Master, Master Blaster
Batting style: Right-hand bat
Bowling style : Right-arm offbreak, Legbreak googly
Sachin Tendulkar height : 5 ft 5 in
Education: Sharadashram Vidyamandir School
People in India want to know complete Sachin Tendulkar biography. When anyone goes through Sachin Tendulkar profile or Sachin Tendulkar biography, he comes to know how a young boy from Mumbai rose to the height of popularity in the world of Cricket. Sachin Tendulkar height may not be that big, but his stature is the biggest in the Cricketing world. This website puts a full-stop on your search for Sachin Tendulkar biography.

A bit more on Sachin Tendulkar profile: Sachin Tendulkar is considered one of the complete batsmen ever. He has all the shots in the book. Also, he is unarguably the biggest crowd puller and icon of the game. Even, all time great Late Sir Don Bradman told his wife that Sachin reminded him of himself. Few people know that Sachin actually wanted to become a fast bowler, but legendary pacer Denis Lillee turned away Sachin from MRF Pace Academy , based in Chennai. Debuted at the age of 16, a glimpse of greatness was seen by another Indian great Kapil Dev, when he continued to bat with a blood soaked shirt, as he was hit by a Waqar Younis bouncer in his debut match. He even had 16 international Hundreds before the age of 25. In 2008, he passed Brian Lara as the leading Test runs scorer and the first bastman to score 12,000 runs. There were times in Indian households, when Sachin Tendulkar used to get out, people used to turn off their Television sets.

Sachin Tendulkar birthday is on April 24. In India , Sachin Tendulkar birthday is like a festival among cricket lovers. India is already a cricket crazy country and thus, Sachin Tendulkar birthday is celebrated like a festival. Millions of fan mails and wishes are received by Sachin Tendulkar every year on Sachin Tendulkar birthday. We even wonder, whether there would be a national holiday on Sachin Tendulkar birthday, after he retires from Cricket.

A Shost Biography of Chacha ji..By ankur mishra''yugal''


Pt.Jawaharlal Nehru Personal Details|Biography|Children’s Day Jawaharlal Nehru was the first and also long serving prime minister of India[From 1947 to 1964].He is also referred as Pandit Nehru ("pandit" means "scholar","teacher" in Sanskrit).

Nehru is the son of a Motilal Nehru who was a barrister and politician.Nehru at an young age became the leader of the left wing of the Indian National Congress Party.After the independence,Nehru was recognized as Gandhi's political heir.

Nehru got the first chance to raise the flag of Independent India on 15 August 1947.Nehru was born on 14 November 1889 which was now celebrated as Children's Day.His daughter Indira Gandhi and Grandson Rajiv Gandhi also served as Prime Ministers of India.Nehru died in the early hours of 27 May 1964 of Heart Attack.His birthday,14 November,is celebrated as Children's Day in recognition of his lifelong passion and work for the welfare,education and development of children and young people. Children across India remember him as Chacha Nehru (Uncle Nehru).

Jawaharlal Nehru's Personal Profile

Name : Jawaharlal Nehru
Father : Motilal Nehru [Wealthy Barrister and politician]
Mother : Swarup Rani [Married on February 8,1916]
Sisters : Vijaya Lakshmi and Krishna
Wife : Kamala Nehru [Kamala Kaul - Died in 1936 of Tuberculosis]
Children : Indira Gandhi [Indira Priyadarshini]
Education : Trinity College,Cambridge
Profession : Barrister & Politician
Gotra : Kaul
Born On : 14 November 1889
Expired : 27 May 1964

हर क्षण हर पल कितना अहम हुआ विज्ञान ! ---अंकुर मिश्र ''युगल''





हर क्षण हर पल कितना अहम हुआ विज्ञान !
चाँद सितारों को छू लेना अब बिलकुल आसान !
नै क्रांति पैदा कर दी है धरती पर विज्ञान ने !
नए-नए सोपान सृजन के रच डाले इन्सान ने !
हुआ असंभव भी अब संभव है इसका हर प्रयोग है !
सपनो को साकार करेगी इसकी ''अंकुरित'' उडान !
..............हर क्षण हर पल कितना अहम हुआ विज्ञान.....
श्रम और समय बचा देता है प्रगति पथ का नायक है !
शांति सुरक्षा और सम्रिथ्थी में भी बहुत सहायक है !
अब तो यह वरदान हो गया उन्नति की पहचान है !
वैज्ञानिक पध्दती अपना कर खुश है आज हर किसान !
.............हर क्षण हर पल कितना अहम हुआ विज्ञान........
विकसित हो विज्ञान मगर मानव हित सर्वोपरि हो !
क्या प्राणी क्या जीवजन्तु जड़ चेतन को हितकर हो !
कठिनाई का समाधान हो ऐसा बस ऐसा विज्ञान हो !
इसके हर संभव से बन जाये अपना देश ''महान''!
.............हर क्षण हर पल कितना अहम हुआ विज्ञान........






अंकुर मिश्र ''युगल''

'' मुझे इतना तो न मरो --राष्ट्रभाषा हिन्दी''........अंकुर मिश्र 'युगल'




''आज मै इस तरह से अपने ही घर में लज्जित हो रही हो की किसी के सामने अपने दर्द का व्याख्यान भी नहीं कर सकती !पहले तो मुझे इस बात का कष्ट रहता था की आतंकवाद, नक्सलवाद अदि मेरी माता को लगातार कष्ट दे रहे है, लेकिन उस दर्द का एहसास मुझे नहीं होता था ! अज जब लोग मुझे ही मारने लगे तो मुझे लगा की देश पर आज वास्तविक खतरा मधरा रहा है !और उस कष्ट की अनुभूति हुई जो मेरी मातृभूमि सदियों से सह रही थी ! जब श्री अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में मेरे दर्शन सम्पूर्ण विश्व को कराये थे तो मुझे लग रहा था की मै भी अब इस सखा की सदस्य बन जाउगी !
लेकिन आज की इस व्यस्ततम दुनिया में मुझे नहीं लगता की मेरा वह सपना कोई पूरा कर पायेगा !जो करने वाला था वो असमर्थ हो गया है और जिसको सौपा गया था उसने मेरा विनाश करने की ठान रखी है! मुझे आज मेरी जन्मभूमि में ही कोई सरन देने वाला नहीं है कोई नहीं है जो मेरी दुःख भरी किलकारियों को कोई सुन सके !सब के सब मुझे कष्ट देने में लगे है.....................................................
महाराष्ट्र विधान सभा में मेरी बेइज्जती को सभी ने ख़ुशी ख़ुशी सह लिया ! किसी महान व्यक्तित्व ने मेरी पुरानी छवि को दोबारा वापस दिलाने का सहस किया था लेकिन मेरे ही भाइयो और उपासको ने उस व्यक्तित्व को ऐसा करने का दंड दे डाला !
आखिर इनकी क्या इच्छाए है जो ये मेरी बलि चढा कर पाना चाहते है !यदि ये मेरी वजह से कष्ट में है तो मुझसे कह दे तो मै अपने भाइयो,माताओ, गुरुओ,और देश्वशियो के लिए अपना भी बलिदान कर दुगीं ! lekin मुझे ऐसा भारत चाहिए जो विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र हो जिश्मे तनिक भी बधाये न हो !
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"घोर कलयुग का सामना करती राष्ट्रभाषा के विचार"
प्रस्तुतकर्ता-- अंकुर मिश्र ''युगल''
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पत्रकारिता की ''परिभाषा'' थी 'श्री प्रभाष जोशी जी' ..................अंकुर मिश्र ''युगल ''


हैदराबाद का भारत -आस्ट्रेलिया एकदिवशीय क्रिकेट मैच हम सबने देखा होगा ! उसके मनोरंजक पालो का आनंद भी लाभागाब सबने लिए ही होगा , लेकिन अंततः मैच मेंहमारी हार हमारे लिए शर्मनाक थी , जो की एक वास्तविक भारतीय नागरिक को सदमा दे गयी जो इस विजय मैच की पराजय स्वीकार न कर सके!जी हाँ यह वास्तविक भारतीयता की पहचान है जो वरिष्ठ पत्रकार ''श्री प्रभाष जोशी जी '' जी के अंडार थी !मई उनके बारे में कुछ ज्यादा नहीं जनता हूँ ,न ही उनसे आज तक किसी प्रकार की वार्ता हुई है , लेकिन मैंने उनके बारे में समाचार पत्रों में पढ़ा है !पत्रकारिता की दुनिया के बेताज बादशाह और मेरे आदर्श है वो !वो कभी भी व्याक्ति विशेष पर टिपण्णी न कर के एक व्यापक पाठकगण पर लिखते थे!उनका कहना था की पत्रकारिता में स्पष्ठ पक्ष लेना चाहिय ! किसी विषय पर लिखते हुए पहले दिमाग में साफ होना चाहिए की हमारा स्टैंड क्या है ? वे असाधारण कॉपी एडिटर थे ख़राब से ख़राब कॉपी को शुधर कर शानदार बना सकते थे , वे पलक झपटे ही हेडिंग शुझा सकते थे ! वे प्रत्येक क्षेत्र में लेख लिखने में सखम थे ! उनके दिमाग में नए ज़माने के नए अख़बारों की योजनाये चलती रहती थी !वो ऐसे पत्रकार की कल्पना करते थे ,जो एक आयामी न हो ,बल्कि संपूर्ण पत्रकार हो ,जैसे की वो खुद थे !महानता के बावजूद वो सरल स्वाभाव के नहीं थे ,वो काफी जटिल और टेढ़े थे !वो यह बात जानते थे और इसे बदलना भी नहीं चाहते थे !उनका मानना था की मनुष्य को अपने सिद्धांतों और स्वाभाव के साथ समझोता नहीं करना चाहिए अंतसमय में वो आज कल की पत्रकारिता से काफी विचलित थे और उस पर हमेशा टिपण्णी करते रहते थे !और इन्ही विचारों के साथ उनका ............. स्वर्गवास हो गया !हमे चाहिए की उनके स्वप्नों और विचारों को हम पूरा करें !पत्रकारिता को हम उस मुकाम पर ले जाए जहाँ की उन्होंने कल्पना की थी!हमारे द्वारा उस महान पत्रकार को यही वास्तविक श्रद्धांजली हो सकती है!

''राष्ट्रिय एकता'' भारत को ''इंद''होने से बचा सकते है ......अंकुर मिश्र''युगल''



अखंड ज्योति के रूप में देदिव्यमन विश्वके विकसित राष्ट्रों की नजर वर्तमान के केवल और केवल भारत पर है यह यथार्तातः सत्य है क्योकि भारत ऐसा रास्त्र है जो पूर्ण रुपें सम्प्रभुत्व है प्रत्येक पहलु मजबूत है!लेकिन हमारी कमी जो अनादी कल से चली आ रही है ''आपसी फूट'' ! कहते है अनेकता में एकता का देश है भारत , लेकिन वास्तविकता को महसूस करिए समाज में चल रही भ्रस्ताचारिता से परिपूर्ण कुतनितियो को देखिये लोकतान्त्रिक भारत की रास्ट्रीय व राज्यीय सरकारों को देखिये ,लोगो के पारिवारिक क्लेशो को देखिये नगरीय, राज्यीय आपसी ladaiyo को देखिये , नजर डालिए उन पहलुओ पर जो भारत को अन्दर ही अन्दर खोखला किये जा रहे है और करिए एक दिन वह क्षण अवश्य आयेगा जब देश को देखने वाले देश के रखवाले बन जायेगे और हम उनके नौकिअर ! अतः अज की भारतीय स्थिति को सुधारने के लि कृष्ण , राम , हरीश्चन्द्र के जन्म लेने इ नहीं बल्कि उनके आदर्शो पर चलने वाला बनाकर भारत की ''इन्दीयस्थिति को बचाया जा सकता है ! रास्ट्रीय एकता केवल वह शब्द है जो हमारी प्रत्येक समस्या का निदान है , गरीबो के पेट का भोजन है ,बीमारियों की दावा है, बेरोजगार कारोजगार है ! अतः स्पस्ट है की रास्ट्रीय एकता द्वारा ही हम भारत को ''इंद''होने से बचा सकते है ......Ankur mishra ''Yugal''

संसार के सन्मुख अपनी अत्यधिक बड़ाई करना सबसे बड़ी मुर्खता है !-अंकुर मिश्र''युगल''


संसार के सन्मुख अपनी अत्यधिक बड़ाई करना या किसी बात को अत्यधिक बदकार बताना ही सबसे बड़ी मुर्खता है ! मनुष्य को केवल सत्य ही समाज के सन्मुख प्रस्तुत करना चाहिए ! उसमे अपनी असत्य जोड़ कर मनुष्य एक तो बहुत बड़ा पाप करता है और दूसरा मनुष्यों को भ्रमित करता है ! जो मनुष्य असत्य को साथ लेकर जीवन व्यतीत करता है वो जीवन में असत्यवादी व असफलता की श्रेणी ही प्राप्त करता है ! संसार में यथार्थ सत्य का एक न एक दिन तो ज्ञान होना तय है , तब मनुष्य झूट क्यों बोलते है ! अपने आपको संसार की नजरो में क्यों झुकाते है !अपने एपी को पाप में क्यों डालते है ! मनुष्य नौकरी, पढाई, व्यापर, धन, मकान, आदि क्षेत्रो में लम्बी-लम्बी दंगे हांककर मनुष्य के सामने ही अपनी छवि क्यों ख़राब करते है जिस क्षेत्र में उसे एक भी उन्नति नहीं मिलनी है अतः प्रत्येक मनुष्य यथार्थ सत्य का ही ज्ञान समाज को करना चाहिए ! जिससे समाज में सत्य की प्रतिष्ठा स्थापित होने के साथ-साथ पुण्यो की प्राप्ति होती है !
अंकुर मिश्र''युगल''

राष्ट्रपिता ''बापू'' के नम एक पत्र ............................


पूज्यनीय बापू ,
सादर चरणस्पर्श ।
हम इस कर्मभूमि पर दुरुस्त है और आशा करते है की आप भी अपने संसार में दुरुस्त होगे ! आपकी याद में देश सूना सा होता जा रहा है !
देश के संचालक देश्वशियो की परवाह नही करते है उन्हें तो विकसितो
और अमीरों को और विकसित और आमिर करना है ! देश की गरीबी , देश की सुरक्षा , देश के स्वाभिमान , देश के गौरव की उन्हें परवाह नही है!
आपके के लिए दुखद समाचार है की आपका ''नमक कानून '' निरर्थक सा होता जा रहा है ! आपके द्वारा दिए गए
हथियार ''सत्य'' और ''अहिंषा '' के बारे में तो आपको पता ही होगा की इन हथियारों को तो विदेशियों को बेच दिए है !आपका रामराज मुझे वास्तविक धरातल में लागू होता मुमकिन नही दिख रहा है ,,क्योकि आज की दुनिया और आज की राजनीती में ''रामराज '' का मतलब कुछ दूशरा ही
है !
आज यहाँ न तो न्याय है और न ही समानता और आदर्श आचरण की तो कोई गुनजिस नही है १ चारो ओरबश एक ही होड़ है .........
=>मेरी जात तेरी जात से उची है;
=>मेरा धर्म श्रेष्ठ है;
=>मई तुमसे अच्छा और सच्चा हू
=>मेरा स्तेतश तुमसे बड़ा है;
=>मई सर्वश्रेष्ठ हू!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
आपको उपर्युक्त बाते जानकर कास्ट तो होगा क्योकि आपका देश आज एक विलक्षण स्थिति में है लेकिन आज अहि सत्य है ,यह सत्यता तो क्षणिक है वास्तविकता तो अद्भुत है ! बापू अब एपी का ही सहारा है ,कृपया अपनी शक्तिया हमारे अन्दर शामाहित करे !
अंत में एक दुर्लभ बात बताना चाहूगा की अमेरिकी राष्ट्रपति ''ओबामा दादू ''आपको खाने पर आमंत्रित करना चाहते है लेकिन मेरी आपसे गुजारिश है की एपी उनका अमात्रं जरा सोच-विचार कर स्वीकार करियेगा कही इसमे भी उनकी कोई कूटनीति न हो !
धन्यवाद ,पत्र संभाल के रखियेगा ! शेष अगले पत्र में .......................
आपका
अंकुर मिश्रा "युगल''

Our Great Doctor "KALAM"................

मैनें देखा एक डाक्टर, जो है बडा होशियार
बहुत ही सीधा
, सरल और ईमानदार
ना दवाई ना गोली
, बस बोले मीठी बोली
जादूगर है वो कैसे
, गिन लेते है तारे ऐसे
सूर्य को कर देते भाग
, गृहो को मिलादे एक साथ

जिन्हें है चांद तारो पर जानें की आस
उनके लिये वो रॉकेट बनाते खास
क्या आप जानते है
, कौन है वे व्यक्ति महान
जो है झरने जैसे शीतल
, और पहाड ज़ैसे महान
उनका नाम है डाक्टर ए
.पी.जे. अब्दुल कलाम.

उनका नारा -हर दिये को जलने दो
हर बच्चे को पढने दो
कडी मेहनत से ना कोई मरता
आओ सोचे और उन्नती करे

नासमझी की तबाही से बचे

........PYAR Vs. COLLEGE STUDY........


प्यार का बोल bala vartman समय में बहुत ज्यादा है , आज कल प्यार तो mahej एक shauk bankar रह gya है ! इस jhoothe प्यार में no yuvak itana tallin हो हो गए है की उनको shiksha के बारे में sochane का भी समय nikalana मुश्किल हो गया है ,
आज nao yuvak इस jhoothe प्यार jiski buniyad bhog पर राखी हुई है , में पढ़ कर shiksha को khote जा रहे है inko तो प्यार का vastavik arth भी नहीं पता है shiksha हमारे jivan में sadgun laati है siksha के द्वारा ही हम samjhte हैं की प्यार vastaw में है क्या isse के द्वारा ही manushy vivekvan banata है jisse की usme achchha bura samjhne की chhmata utapann होती है vivekvaan manushy ही प्यार का vashtvik arth samjh sakata है , प्यार की utapatti ही siksha से हुई है siksha के द्वारा ही हमारे shabhyata और sanskrati का vikash हुआ है , प्यार vahi manushy कर सकता है जो प्यार का vashtavik arth janta हो और प्यार के vashtvik arth का gyan vivek के द्वारा ही होता है और vivek का vikash siksha के द्वारा होता है ath siksha ही shreshth है प्यार तो sikha की utapatti है
प्यार का vastvik arth bhog नहीं tyag है और tyag एक vivekvan manushy ही कर सकता है
1 aadhunik प्रेम , प्रेम नहीं apitu bhog है और इस adhunik प्यार पर जो भी guman karata है voh murkh है , ath प्यार को नहीं siksha को अपने dilo dimag में basana chahie jiske पास vivek होगा vahi प्यार का vastvik arth समझ paega और sachcha premi बन paega kyuki siksha ने ही हमारे sanskrati और sbhyata को vikshit किया है एक vivek वन manushya ही सबसे प्यार से बात karega sabko प्यार से dekhega irshya और dwesh उस पर havi नहीं हो paenge ath हमें siksha पर dhyan dena chahie हमारे jivan के vikash hetu siksha mahatwpurn है