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क्या "स्त्री" होना अपराध है ?

क्या "स्त्री" होना अपराध है ?
दिन भर ताना सुन
कर भी,
कितनी खुश होती है वो...
बिना 'खाने' के 
दिन गुजर जाता है
उसका...
बिना 'शिकायत' के 
जिंदगी गुजार देती है 
'वो'...
फिर भी उस पर ये 'इन्सान' 
इतना 'शैतान' क्यों है ?
हैवान क्यों है ?
क्या अपराध किया जो वो "स्त्री" हुयी ?
राते बिता देती है वो 
रोटी से बाते करके...
अगर एक दिन 'मै' देर से आया...
घर में अकेले पूरी 'जिंदगी'
बिता देती है 'वो' 
सीमा में खड़े 'पति' के लिए....
साथ कोई हो न हो
'वो' हमेशा साथ खड़ी होती है...
कभी भी,
कही भी,
कैसे भी,
फिर भी उसकी सांसो में चीत्कार क्यों ? 
क्या अपराध है उसका 
यही की वो "माँ", "पत्नी" या "बहिन" है ?

न जाने कितने 'वार'
व्रत में गुजर देती है वो, 
हमेशा 'पति' के जूठन से 
खोलती है सारे व्रत वो,
फिर भी मुस्कराने पर 
"बदचलन" बता दिया उसे... 
घर से बाहर निकली 
तो 'दामिनी' बना दिया उसे...
आखिर अपराध क्या था ?
यही की वो "नारी" थी ?
#YugalVani
https://www.facebook.com/er.ankur.mishra/posts/763385387034336?notif_t=like

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

.... लो अब वो समय भी आ गया..

लो अब वो समय भी आ गया
कमर कस के बैठ जाओ
जन स्वप्न को बनाने में.
स्वराज को दिखाने में  
विचार और विकास का अंकुर’ण कराना है
सियासत और विरासत नहीं
कूटनीति और राजनीती नहीं
एक पृष्ठ में ईमानदारी लगाना
भ्रष्टाचार और अत्याचार भागाना
बुझी हुये दीप को जगाना
बस यही काम कराना...
की जनता को जगाया है
ये जनता है सब कुछ जानती है
बस उन्हें सबक सिखाना आ गया है
है कौन अपना और पराया
बस अब फर्क करना आ गया है
ये लौ लिखी है आप’से
अब आप’को निभाना है
कमर कास लो आप’लोगो
लो अब वो समय भी आ गया