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कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
हिन्दू का बना चेटका 
मुल्ला का घर कबर 
कौन है ये खुदा ऊपर 
जिसने तवारीख पढाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
सुबह को शाम की 
शाम को सुबह की
जिसने अकल्याण के अंकुर'ण का
भयावह सन्देश भिजवाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
एक खुले आम कहता है 
बगावत का एलान करता है 
खुद को जंगली और 
संसार को है जंगल बनाया
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?
ओ मसीहा, भगवान, मअल्लाह 
क्या एक आदमी-औरत नहीं थे गवांरा
हिन्दू, मुसलमान,इसाई में 
इन्हें भी बाँट डाला 
और बांटा भी तो ऐसा की 
'
मानव ने ही मानव को काट डाला'
कौन सा जोगी ये मजहब लाया..?

.... लो अब वो समय भी आ गया..

लो अब वो समय भी आ गया
कमर कस के बैठ जाओ
जन स्वप्न को बनाने में.
स्वराज को दिखाने में  
विचार और विकास का अंकुर’ण कराना है
सियासत और विरासत नहीं
कूटनीति और राजनीती नहीं
एक पृष्ठ में ईमानदारी लगाना
भ्रष्टाचार और अत्याचार भागाना
बुझी हुये दीप को जगाना
बस यही काम कराना...
की जनता को जगाया है
ये जनता है सब कुछ जानती है
बस उन्हें सबक सिखाना आ गया है
है कौन अपना और पराया
बस अब फर्क करना आ गया है
ये लौ लिखी है आप’से
अब आप’को निभाना है
कमर कास लो आप’लोगो
लो अब वो समय भी आ गया